Hindi kahani [ दो भाई की कहानी ] बोध कहानी - Sohohindi.in

दो भाई की कहानी - best hindi kahani - Soho hindi 

Sabse achhi aur majedar bodh kahani. Ye kahani rishto se judi kahani he. Ye kahani padhne ke baad apko aanad mehsus hoga. Do bhai ki kahani jarur padhe.

एक बार दो भाईओ ने अपनी मिलकत को बाटा. सभी चीजों को आधा आधा बाट लिया . लेकिन एक सोने की अंगूठी के लिए जगड पड़े.  एक भाई बोले ये अंगूठी मेरी दुरसा भाई बोले ये तो में ही लूंगा. ऐसे करते हुए दोने में झगड़ा हो गया. बरसो के सम्बंद टूटे ऐसी स्थिति हुइ. दोनों भाई जगड़ते हुए गांव के सरपंच के पास पहुचे .

गांव के सरपंच बहुत अच्छे और दयालु थे . किसीको मुश्किल में देखके उसकी मदद करते. और सभी गांव वाले उसको मान सम्मान देते. सरपंच ने दोनों भाई ओ की बात अच्छे से सुनी. उसने दोनों भाईओ के सम्बन्ध ना टूटे ऐसा उपाय सोचा. सरपंच ने ओ अंगूठी अपने पास रख ली. चार पांच दिन बाद दोनों भाई एक बाद एक सरपंच के पास आने का सोचा.

पांच दिनों  बाद दोनों भाई एक के  बाद एक  सरपंच के पास गए. सरपंच ने गांव के सोनीमहाराज से उस अंगूठी के जैसी दूसरी अंगूठी बनवाइ थी. सरपंच ने दोनों भाईओ को एक बाद एक  एक अंगूठी देदी. अंगूठी देते हुए सरपंच ने कहा की ये अंगूठी में आपको दी है .ऐसी बात आपके भाई को मत कहना. और इस अंगूठी को पहन ना नहीं. घर में संभाल के रखना.


ऐसे दोनों भाईओ के सम्बंध टूट ने से बच गए. एक साल बाद उन की बहन की सगाई  का प्रसंग आया. सगाई के दिन ऐसी घटना हुए की सगाई के लिए जो अंगूठी लाये थे वो अंगूठी गुम हो गई. इज्जत ना जाये वैसे दोनों भाई ओ ने अपनी अपनी  अंगूठी लेके बहन के पास आ गए. एक अंगूठी बहन को दी और सगाई की विधि समाप्त हुइ. दोनों भाईओ को सरपंच की कही हुए बात याद आयी.
L
दोनों भाई सोच में पड़ गए ये क्या हुआ. वही सगाई में आये हुए सरपंच पर दोनों भाईओ की नजर पड़ी. दोनो को बात समझते देर न लगी. सरपंच हँसाने लगे सरपंच ने दो नो भाईओ को कहा भाई किम्मत चीज़ वस्तु ओ की नहीं सम्बंध की है. सगाई समाप्त होनो के बाद गुम हुए अंगूठी भी मिल गई .

अब दोनों भाई  सगाई की अंगूठी और एक खुद की अंगूठी लेके सरपंच के घर पहुचे. उन्हों ने दोनों अंगूठी सरपंच को देदी . तभी सरपंच ने कहा भाईओ में तो आपको एक ही अंगूठी दी थी  आप मुझे दो अंगूठी या क्यों दे रहे हो. तब दोनों भाई बोले चीज वस्तु से सम्बंध अधिक मूल्य है . जैसे आप हमारा घर सम्बन्ध टूट ने से बचाया ऐसे . इसमें से दूसरे का घर भी बचाना सरपंच जी.

बोध: जैसी भी कीमती वस्तु हो . लेकिन उसके कारण से दोस्त दोस्त भाई भाई पिता पुत्र जैसे पवित्र संबध बिगाड़ना नहीं चाहिए . कोइ चीज वस्तु तो फिर मिल जाएगी. लेकिन बिगड़े हुए संबध सही होने में बहुत समय लगता है.

School ki best kahani  bodh aur samjne ki kahani